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September 21, 2021
Charis Journal

विरोध की जड़ में धान – गेहूं की फसल से पंजाब के किसानों का मोह भी

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पंजाब में तीनों कृषि विधेयकों का विरोध लगातार जारी है और इसका मुख्य कारण गेहूं और धान की खेती है। सरकार की कोशिशों के बावजूद पंजाब के किसान दोनों फसलों के चक्र से नहीं निकल पा रहे। सूबे में 180 लाख टन गेहूं और 110 टन चावल पैदा होता है। हालांकि सरकार द्वारा किसानों को कपास व मक्की की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, लेकिन किसान फसली चक्र से बाहर नहीं निकल रहे। तीन कृषि विधेयकों में एक विधेयक गेहूं व चावल की खरीद से ही जुड़ा है, जिसको लेकर पंजाब में बवाल मचा हुआ है। जानकारी के अनुसार, इस साल पंजाब में 37 लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती की गई थी।

फसल मंडियों में आई और एफसीआई-पनसप ने खरीद की। इस बार धान की पैदावार 110 लाख टन होने की उम्मीद है। इसकी खरीद को लेकर एफसीआई और पनसप तैयारी कर रही है। सरकार इन दोनों फसलों की खरीद का अधिकार निजी हाथों में देना चाहती है लेकिन किसान इसका विरोध कर रहे हैं।
पंजाब सरकार की तरफ से लगातार कोशिश की जाती रही है कि किसानों को किसी तरह से धान व गेहूं की खेती से निकाला जा सके। एक किलो चावल की पैदावार के लिए 5500 लीटर पानी की खपत होती है। सरकार की तरफ से कोशिश चल रही थी कि एक तीर से दो निशाने लगाए जाएं। एक तो पंजाब के पानी को बचाया जाए दूसरा सरकारी एजेंसियों को खरीद से निकाला जाए।
यही वजह है कि पिछले साल राज्य में नरमे का क्षेत्रफल 3 लाख 92 हजार हेक्टेयर था, जो इस साल बढ़ाकर 5 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसी तरह किसानों को मक्की और अन्य वैकल्पिक फसलों की बिजाई के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मक्की की फसल 80 हजार हेक्टेयर तक जा पहुंची है। पंजाब में किन्नू की खेती भी होती है। देश का 24 फीसदी किन्नू सूबे में उगाया जाता है। पंजाब में फलों का राजा माना जाने वाला कीनू दो खट्टे कृषि प्रजाति (साइट्रस नोबिलिस और विलो लीफ) का मिश्रण है। सरकार की तरफ से किन्नू की खेती को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

हॉर्टिकल्चर विभाग ने पॉली फार्मिंग पर काफी जोर दिया है, जिससे पंजाब में शिमला मिर्च की पैदावार काफी बढ़ गई है। मानसा, फिरोजपुर, पटियाला और संगरूर में उगाई जाने वाली शिमला मिर्च 5 हजार मीट्रिक टन सरप्लस हो गई जबकि 12 हजार मीट्रिक टन तरबूज, 6 हजार टन ककडिय़ां सरप्लस हो गईं लेकिन किसानों को इन फसलों का उचित मूल्य नहीं मिला।

पंजाब में करीब 50 हजार हेक्टेयर जमीन पर करीब 24 हजार टन सब्जियों की पैदावार होती है। शिमला मिर्च की खेती करीब साढ़े 13०० हेक्टेयर जमीन पर होती है। यहां की शिमला मिर्च का मुख्य बाजार दिल्ली और एनसीआर हैं। हालांकि पिछले कुछ समय से इन फसलों का बाजार में मूल्य नहीं मिल पा रहा है, जिससे किसान निराश व हताश हैं। यही वजह है कि किसान कुछ समय के लिए धान व गेहूं की फसली चक्र से निकलता है लेकिन सब्जी व फल का उचित मूल्य न मिलने से दोबारा फसली चक्र में फंस जाता है।

सरकार फसल खरीदती है, किसान सुरक्षित महसूस करते हैं
गेहूं व धान की फसल पंजाब की मुख्य फसल है। दोनों फसलें जब मंडी में आती हैं तो किसानों को तत्काल पैसा मिलता है। एक तय मूल्य मिलता है, जिससे वह पूरा साल गुजारा चलाता है। इससे किसानों को अपना भविष्य सुरक्षित दिखता है। दोनों फसलों की खरीद एफसीआई व पनसप करती हैं। दोनों फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय है, उसी मूल्य पर सरकार फसल को खरीदती है।

 

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