29.1 C
Delhi
September 21, 2021
Charis Journal

सिर्फ पराली ही नहीं ये फैक्टर भी हैं जिम्मेदार, हर साल अक्टूबर में ही क्यों दिल्ली में बढ़ जाता है प्रदूषण?

प्रदूषण का स्तर हर दिन बढ़ रहा है. सांस लेने में तकलीफ होने लगी है. कोरोना काल के बीच प्रदूषण का ये स्तर डरा रहा है. लेकिन सवाल ये है कि हर साल अक्टूबर में ही कैसे दिल्ली में प्रदूषण बढ़ जाता है. इस सीजन में जब भी प्रदूषण की बात होती है तो चर्चा का केंद्र पराली बन जाती है. यहां तक कि सरकार के नुमाइंदे भी ये कहने से परहेज नहीं करते कि पड़ोसी राज्यों में पराली जलने के कारण प्रदूषण बढ़ जाता है.

दिल्ली में जैसे-जैसे सर्दियों की आमद हो रही है वैसे-वैसे यहां के आसमान पर जहरीली धुंध की परतें जमती जा रही हैं. प्रदूषण का स्तर हर दिन बढ़ रहा है. सांस लेने में तकलीफ होने लगी है. कोरोना काल के बीच प्रदूषण का ये स्तर डरा रहा है. लेकिन सवाल ये है कि हर साल अक्टूबर में ही कैसे दिल्ली में प्रदूषण बढ़ जाता है.

इस सीजन में जब भी प्रदूषण की बात होती है तो चर्चा का केंद्र पराली बन जाती है. यहां तक कि सरकार के नुमाइंदे भी ये कहने से परहेज नहीं करते कि पड़ोसी राज्यों में पराली जलने के कारण प्रदूषण बढ़ जाता है. हालांकि, हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि प्रदूषण में पराली की हिस्सेदारी महज 4 फीसदी है. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि फिर कौन से कारण हैं जो इस सीजन में दिल्ली को प्रदूषण की चपेट में ले लेता है.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, आमतौर पर अक्टूबर में उत्तर पश्चिम भारत में मानसून की वापसी का वक्त होता है. मानसून के दौरान, हवा की दिशा पूर्व में होती है यानी पुरवैया चलती है. बंगाली की खाड़ी के ऊपर से चलने वाली ये हवाएं देश के इस हिस्से में बारिश और नमी लाती हैं. लेकिन जब मानसून खत्म हो जाता है तो हवाओं की दिशा उत्तर की तरफ हो जाती है. वहीं, गर्मी के दौरान हवा की दिशा उत्तर-पश्चिम की ओर होती है जो राजस्थान और कभी-कभी पाकिस्तान और अफगानिस्तान से धूल उड़ाकर लाती है.

दिल्ली में बढ़ रहा है प्रदूषण-PTI

नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी की एक स्टडी में ये बात सामने आई है कि सर्दियों में दिल्ली में 72 फीसदी हवाएं उत्तर-पश्चिम से आती हैं, जबकि बाकी 28 फीसदी इंडो-गंगा यानी उत्तरी मैदानी इलाकों से आती हैं. यानी इस सीजन में दिल्ली में ज्यादातर हवा धूल वाले इलाकों से आती हैं.

हवा की दिशा में बदलाव के अलावा तापमान में गिरावट भी प्रदूषण के स्तर को बढ़ाने का काम करती है.

इसके अलावा तेज हवा भी प्रदूषण बढ़ने का एक कारण होती है, लेकिन गर्मियों की तुलना में सर्दियों की हवा की गति में कमी आती है और मौसम के हालात ऐसे बन जाते हैं कि इस तरह के इलाके प्रदूषण का केंद्र बन जाते हैं. जब खेत में पराली जलाई जाती है और धूल भरी आंधी चलती हैं तो पहले से ही प्रदूषित हवा में घुलकर ये वायु की गुणवत्ता को और खराब कर देती हैं.

प्रदूषण के अन्य कारण
धूल और वाहनों से होने वाला प्रदूषण भी दिल्ली में सर्दियों के दौरान हवा की क्वालिटी को खराब करता है. ड्राई कोल्ड यानी शुष्क ठंड के दौरान धूल पूरे इलाके में फैल जाती है. क्योंकि इस दौरान आमतौर पर बारिश नहीं होती है इसलिए धूल का प्रभाव कम नहीं हो पाता है. IIT कानपुर की स्टडी में सामे आया है कि धूल से होने वाले प्रदूषण की PM 10 में हिस्सेदारी 56% होती है. सर्दियों के दौरान PM 2.5 में 20% प्रदूषण वाहनों से होता है. यही वजह है कि दिल्ली सरकार ऑड-ईवन फॉर्मला भी लागू करती रही है. लॉकडाउन के दौरान भी इसका सबूत देखने को मिला जब सड़कों पर वाहन नहीं थे, तो दिल्ली का आसमान नीला नजर आने लगा था, लोग सोशल मीडिया पर जमकर फोटो पोस्ट कर रहे थे.

Related News

2 comments

hydroxychloroquine for coronavirus 19 July 19, 2021 at 11:13 PM

hydroxychloroquine package insert

center adrenal glands break

Reply
ivermectin for uti infection September 21, 2021 at 10:45 AM

cap stromectol 6

fail mindfulness strengthen

Reply

Leave a Comment