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September 20, 2021
Charis Journal

आज किसान आंदोलन को है उनकी जरूरत! कभी कृषि मुद्दों पर सरकारों को हिला देते थे ये नेता

andolan

सार
क्षेत्रीय दलों ने भी किसानों की आवाज को इधर-उधर कर दिया। शरद जोशी जैसे नेता अस्सी के दशक में प्याज को लेकर सरकार हिला देते हैं, लेकिन आज संबंध खराब होने के बावजूद पाकिस्तान से प्याज मंगा ली जाती है। विपक्ष ऐसे मौके पर कुछ नहीं बोलता। किसान नेता भी चुप्पी साध लेते हैं…

 

विस्तार
कृषि अध्यादेशों के विरोध में शुक्रवार को भारत ‘बंद’ का आह्वान किया गया। जैसा कि पहले से ही कहा जा रहा था यह बंद दो-तीन राज्यों तक ही रहेगा। बाकी जगहों पर इसका प्रतीकात्मक असर ही देखने को मिलेगा। किसान संगठन भी सोशल मीडिया पर इस बंद को ‘सुपरहिट’ बनाने में जुटे थे। लेकिन कभी किसानों के मुद्दे पर सरकारों को हिलाने वाले चौ. छोटूराम, चौ. चरण सिंह, चौ. देवीलाल, शरद जोशी, महेंद्र सिंह टिकैत, बलदेव राम मिर्धा, एनजी रंगा और एमडी नंजुंडास्वामी सरीखे नेताओं की कमी आज भी महसूस की जाती है। उस दौर के किसान नेताओं की हैसियत देखिये कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के मंच पर तत्कालीन पीएम चंद्रशेखर, डिप्टी पीएम चौ. देवीलाल और मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव विराजमान रहते हैं। दिल्ली के बोट क्लब पर टिकैत पांच लाख किसानों को लेकर आ जाते हैं। जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर और राजनीति एवं सामाजिक व्यवस्था के जानकार आनंद कुमार आगे कहते हैं कि आज विश्वास का अभाव, दलगत राजनीति और वर्ग विभाजन ने किसानों को बांट कर रख दिया है। किसान नेता भी इन्हीं तीन बिंदुओं में फंस कर रह गए।

 

प्रो. आनंद कुमार का कहना है कि मौजूदा दौर के किसान नेताओं में विचारधारा को लेकर कोई स्पष्ट राय नहीं बन पा रही है। इनके संगठन भी बहुत ज्यादा हो गए हैं। योगेंद्र यादव, वीएम सिंह और अविक साहा जैसे कार्यकर्ता किसानों की आवाज उठाते रहते हैं। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के बैनर तले करीब दो सौ किसान संगठन आवाज बुलंद करते हैं। मुद्दों को लेकर किसानों और उनके नेताओं में अंदरुनी फासला देखा जा रहा है। इसके बाद जाति और भाषा पर किसानों को बांट दिया जाता है।
क्षेत्रीय दलों ने भी किसानों की आवाज को इधर-उधर कर दिया। शरद जोशी जैसे नेता अस्सी के दशक में प्याज को लेकर सरकार हिला देते हैं, लेकिन आज संबंध खराब होने के बावजूद पाकिस्तान से प्याज मंगा ली जाती है। विपक्ष ऐसे मौके पर कुछ नहीं बोलता। किसान नेता भी चुप्पी साध लेते हैं। एक वो किसान एकता थी, जिसके बलबूते चरण सिंह प्रधानमंत्री के पद तक पहुंच गए और देवीलाल उपप्रधानमंत्री बन बैठे। आनंद कुमार बताते हैं कि उन नेताओं की एक आवाज पर किसान अपना खेत छोड़कर आ जाता था। यह अलग बात है कि बहुत से नेता जो दिल्ली या लखनऊ पहुंचते थे, वे कुछ बदल भी जाते थे।

 

 

 

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