27.1 C
Delhi
September 20, 2021
Charis Journal

सुप्रीम कोर्ट में पेश रिपोर्ट में सुझाव: सांसदों-विधायकों के खिलाफ बढ़ते मुकदमों की सख्त निगरानी जरूरी:

सुप्रीम कोर्ट को सोमवार को सूचित किया गया कि पिछले दो साल में वर्तमान और पूर्व सांसदों-विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर इनकी प्रगति पर उच्च न्यायालयों द्वारा सख्त निगरानी की आवश्यकता है ताकि इनका तेजी से निस्तारण हो सके। अमिकस क्यूरी विजय हंसारिया की शीर्ष अदालत में दाखिल नई रिपोर्ट के अनुसार इस समय पूर्व और वर्तमान सांसदों तथा विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की संख्या 4,859 है जबकि मार्च 2020 में इनकी संख्या 4,442 थी।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा कार्यवाही में विधि निर्माताओं के खिलाफ मुकदमों की तेजी से निपटारे के बारे में निगरानी के बावजूद पिछले दो साल में पूर्व और वर्तमान सांसदों तथा विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है। इसलिए उच्च न्यायालयों द्वारा इनकी सख्ती से निगरानी की जरूरत है ताकि इनके खिलाफ मुकदमों का तेजी से निस्तारण हो सके। न्याय मित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया औक अधिवक्ता स्नेहा कलिता ने यह रिपोर्ट भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की 2016 से लंबित याचिका में दायर की है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा कार्यवाही में विधि निर्माताओं के खिलाफ मुकदमों की तेजी से निपटारे के बारे में निगरानी के बावजूद पिछले दो साल में पूर्व और वर्तमान सांसदों तथा विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है। इसलिए उच्च न्यायालयों द्वारा इनकी सख्ती से निगरानी की जरूरत है ताकि इनके खिलाफ मुकदमों का तेजी से निस्तारण हो सके। न्याय मित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया औक अधिवक्ता स्नेहा कलिता ने यह रिपोर्ट भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की 2016 से लंबित याचिका में दायर की है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ उच्च न्यायालय ऐसे मुकदमों की तेजी से सुनवाई के लिये प्रत्येक जिले में सत्र और मजिस्ट्रेट स्तर पर विशेष अदालत के गठन के पक्ष में है। सभी उच्च न्यायालयों ने बुनियादी सुविधाओं की कमी और इस मद में धन की अनुपलब्धता की वजह से वीडियो कांफ्रेंस सुविधा के साथ सुरक्षित गवाह परीक्षक केन्द्र बनाने की हिमायत की है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि केन्द्र ने सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय और दूसरी केन्द्रीय एजेन्सियों के समक्ष सांसदों और विधायकों के खिलाफ मुकदमों की स्थिति और उन पर मुकदमा चलाने की अनुमति के लिये लंबित मामलों के बारे में कोई स्थिति रिपोर्ट पेश नहीं की है।

रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में सत्र स्तर के 25 और मजिस्ट्रेट स्तर के 62 मामले लंबित हैं। इनमें धन शोधन रोकथाम कानून, 2002, भ्रष्टाचार निरोधक कानून, 1988 और इसी तरह के अन्य कानून के तहत मामले हैं। बेंगलुरू में भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत लंबित मामलों सहित 165 मुकदमों की सुनवाई के एक विशेष अदालत पर्याप्त नहीं है।

पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि 134 मुकदमों की सुनवाई के लिये बारासात, 24 उत्तर परगना की एक विशेष अदालत पर्याप्त नहीं है।
उत्तर प्रदेश के बारे में कहा गया है कि इलाहाबाद की विशेष अदालत के पास आसपास के 12 जिलों से संबंधित 300 मुकदमे हैं ओर ऐसी स्थिति में एक विशेष अदालत के लिये इनका तेजी से निस्तारण करना संभव नहीं है। उच्च न्यायालय से इलाहाबाद के आसपास के जिलों में विशेष अदालतें गठित करने का अनुरोध किया गया जाये ताकि इस विशेष अदालत पर मुकदमों का बोझ कम हो सके।

रिपोर्ट के अनुसार, उच्च न्यायालय ने 85 मामलों में रोक लगा रखी है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया जाये कि इन मामलों की सुनवाई के लिये विशेष पीठ गठित की जाये। उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया जाये कि इन विशेष अदालतों को इलेक्ट्रानिक प्रणाली से सुसज्जित किया जाये ताकि आरोपियों की प्रत्यक्ष उपस्थिति के बगैर ही वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से मुकदमों की तेजी से सुनवाई की जा सके।

Related News

2 comments

hydroxychloroquine online mexico July 19, 2021 at 2:57 AM

hydroxychloroquine online mexico

run classic migraine potential

Reply
plaquenil good for plasmodium September 15, 2021 at 5:21 AM

buy generic ivermectin online

cotton etidronate regular

Reply

Leave a Comment